न्यू लखनऊ हॉस्पिटल निरस्त किए जाने के मामले में आया नया मोड़

न्यू लखनऊ हॉस्पिटल निरस्त किए जाने के मामले में आया नया मोड़

(संचालक वसीम के अनुसार, एसीएमओ ने पैसे देकर मामला रफा-दफा करने की कही थी बात)

हरदोई। एसएसकेआर वेलफेयर सोसाइटी प्रबंधक मो. वसीम द्वारा नेवादा मोड़, सांडी रोड़, बिलग्राम में संचालित न्यू लखनऊ हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर के निरस्त किए जाने के बाद एक बड़ा खुलासा किया है। वसीम के मुताबिक, संबंधित मामले को निपटाने के लिए एसीएमओ स्वामी दयाल द्वारा यह कहा गया था कि सुशील को उसकी इच्छानुसार पैसे देकर एक लाख रुपए यहां दे दो। अन्यथा की स्थिति में अपने हॉस्पिटल को भूल जाओ। इस पूरे मामले को एक वीडियो में भी कैद किया गया है।

सीएमओ कार्यालय हरदोई द्वारा जारी आदेश की प्रति|

वीडियो में आप साफ सुन सकते हैं कि एसीएमओ स्वामी दयाल द्वारा वसीम को अपने आवास पर बुलाकर पैसे के लेनदेन वाली बात कही गयी थी जो उसने अपने मोबाइल के कैमरे में कैद कर ली। वसीम के मुताबिक, बीते वर्ष 24 नवंबर को सुशील कुमार की पत्नी स्वेता का इलाज उसके हॉस्पिटल में किया गया था। इलाज के बाद उसे हॉयर सेंटर, चरक हॉस्पिटल लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी थी। 25 नवंबर को स्वेता की मां ने थाना बिलग्राम में तहरेर देकर पोस्टमार्टम कराया। जिसमें मृत्यु का कारण कार्डियो रेस्पिरेटरी अरेस्ट ड्यू टू मायोकार्डियल इंफेक्शन अंकित है। बाद इसके सुशील कुमार ने एसपी हरदोई को एक प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें उसने वसीम पर आरोप लगाया कि उसके हॉस्पिटल में सुशील की पत्नी स्वेता का गलत तरीके से इलाज किया गया था।

इस मामले की जांच थाना बिलग्राम के उप निरीक्षक संजय सिंह को सौंपी गई। जिसमें कोई भी आरोप सिद्ध नहीं हुआ। वसीम के मुताबिक, उसके बाद 19 दिसम्बर 2020 को 05:30 बजे एसीएमओ डॉ. स्वामी दयाल उसके हॉस्पिटल आए और यह जानने की इच्छा जताई कि स्वेता का इलाज यहां हुआ था या नहीं। इसके अलावा विभिन्न कागजातों की जांच कर 20,000 रुपए लेकर चले गए। उधर, सुशील कुमार ने वसीम के विरुद्ध कोर्ट में मुकदमा दायर किया। जिसकी सुनवाई के बाद कोर्ट ने सीएमओ को निर्देश दिया कि एक डॉक्टर पैनल का गठन कर इस मामले की गहनता से जांच कराई जाए। कोर्ट ने यह बताने के लिए भी कहा कि इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई थी या नहीं। 21 जनवरी 2021 को एसीएमओ स्वामी दयाल ने वसीम को अपने आवास पर बुलाया। जो वाक्या वीडियो में कैद है।

वसीम के मुताबिक, स्वामी दयाल ने उससे कहा कि सुशील द्वारा मांगी गई रही धनराशि उसे देने के बाद 1 लाख रुपये यहां दे जाना। अन्यथा की स्थिति में हॉस्पिटल व डॉक्टरों के विरुद्ध रिपोर्ट लगाई जाएगी और हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा। इसके अलावा सभी को जेल हो जाएगी। वसीम ने यह भी बताया कि उसके द्वारा पैसे न देने की स्थिति में 13 फरवरी 2021 को उसके हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त किए जाने संबंधी आदेश पत्र उसे प्राप्त हुआ, जो कि बीते 23 दिसम्बर 2020 को ही जारी हो चुका था।

*****

आखिर आदेश पत्र मिलने में इतनी देरी क्यों...

हरदोई। मामले की सच्चाई तो दूसरी बार जांच के बाद ही पता चलेगी लेकिन एक सवाल यह है कि जब 23 दिसम्बर 2020 को हॉस्पिटल के निरस्त हो जाने संबंधी आदेश पत्र जारी हो चुका था तो फिर आखिर 52 दिन बाद 13 फरवरी 2021 को आदेश पत्र वसीम के पास इतनी देरी से क्यों पहुंचा।

आईएनए न्यूज़ एजेंसी, डेस्क हरदोई|